• संवाददाता

मोदी ने मगहर में विरोधियों को 'सुनाए' कबीरदास के दोहे


प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'दुर्भाग्य से महापुरुषों के नाम पर ऐसी राजनीति की धारा तैयार की जा रही है जो समाज को तबाह कर रहा है..उन्हें बस कलह और राजनीति चाहिए...कुछ ऐसी पार्टियां हैं जो शांति और विकास के बजाय कलह चाहते हैं। उन्हें लगता है कि अगर अशांति होगी तो उन्हें राजनीतिक फायदा मिलेगा। सच्चाई ये है कि ऐसे लोग जमीन से कट चुके हैं...उन्होंने कबीर को कभी जाना ही नहीं।'

हालिया बंगला विवाद की ओर इशारा करते हुए प्रधानमंत्री ने बिना नाम लिए यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव पर हमला बोला। पीएम ने कहा, 'मुझे याद है जब गरीबों के लिए पीएम आवास योजना शुरू हुई तो...पिछली सरकार में रहे लोगों ने सवाल उठाए। पिछली सरकार गरीबों के लिए बनाए गए घरों की संख्या तो बताती...लेकिन उन्हें अपने आलिशान बंगलों की रुचि थी...जबसे यूपी में योगीजी की सरकार आई तब से यूपी में गरीबों के लिए रेकॉर्ड घरों का निर्माण हो रहा है।'

पीएम मोदी ने आपातकाल का जिक्र कर कांग्रेस और जनता परिवार के हिस्सा रहे दलों को घेरा। प्रधानमंत्री ने कहा, 'कबीर ने मोक्ष का मोह नहीं किया लेकिन समाजवाद और बहुजन को ताकत देने के नाम पर राजनीतिक दलों के सत्ता के लालच को देखा जा सकता है...आपातकाल लगाने और उस वक्त उसका विरोध करने वाले आज कंधा से कंधा मिलाकर कुर्सी झपटने की फिराक में घूम रहे हैं...ये सिर्फ अपने और अपने परिवार के हितों के लिए चिंतित हैं...गरीबों, पिछड़ों, शोषितों, दलितों को धोखा देकर ये अपने भाइयों, परिवारों और अपनों को करोड़ों की संपत्ति बनाने दे रहे हैं।' पीएम ने विपक्षी दलों पर तीन तलाक बिल को लटकाने का आरोप लगाया। प्रधानमंत्री ने कहा, 'सरकार तमाम धमकियों को दरकिनार कर तीन तलाक हटाने के लिए प्रयास कर रही है लेकिन स्वार्थी दल उस बिल का विरोध कर रहे हैं।'

पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के इतने वर्षों तक हमारे नीति निर्माताओं ने कबीर की इस नीति को नहीं समझा कि मांगन मरण समान है। उन्होंने कहा, 'कबीर ने कहा था कि आदर्श शासक वही है जो जनता का पीड़ा समझता हो और उसे दूर करने की कोशिश करता हो...राम उनके आदर्श थे लेकिन अफसोस आज कई परिवार खुद को जनता का भाग्यविधाता समझकर संत कबीर की बातों को नकार रहे हैं...कबीरदास ने रूढ़ियों पर प्रहार किया था, भेदभाव की हर व्यवस्था को चुनौती दी थी...वंचितों, शोषितों को कबीर सशक्त बनाना चाहते थे, वह उसको याचक बनाकर नहीं रखना चाहते थे....मांगन मरण समान है, मत कोई मांग्यो भीख, मांगन से मरना भला....लेकिन आजादी के इतने वर्षों तक हमारे नीति निर्माताओं ने कबीर की इस नीति को नहीं समझा...लेकिन बीते 4 सालों में हमने उस रीति-नीति को बदलने का भरसक प्रयास किया...हमारी सरकार ने गरीब, शोषित, पीड़ित, वंचितों के सशक्तीकरण का प्रयास कर रही है।'

प्रधानमंत्री ने इस मौके पर अपनी सरकार की उपलब्धियों का भी बखान किया। पीएम मोदी ने कहा, '80 लाख से ज्यादा महिलाओं को उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन, एक करोड़ 70 लाख को एक रुपये महीने पर बीमा सुरक्षा कवच देकर, बैंक खातों में सीधा पैसे ट्रांसफर करके सशक्त किया है....आयुष्मान भारत के जरिए गरीबों को सस्ता, सुलभ स्वास्थ्य सेवा देने की कोशिश कर रहे हैं।'

संत कबीर को कर्मयोगी बताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार कबीर के रास्ते पर चल रही है और भारत के एक-एक इंच भूमि को विकास से जोड़ा जाएगा। पीएम ने कहा कि कबीरदास ने कहा था कि काल्ह करे सो आज कर...हमारी सरकार भी इसमें यकीन करती है। प्रधानमंत्री ने कहा, 'कबीर कर्मयोगी हैं....आज तेजी से पूरी हो रही योजनाएं, दोगुनी गति से बनती सड़कें, दोगुनी गति से बिछ रही रेल पटरियां, तेजी से गांवों तक पहुंचता ऑप्टिकल फाइबर... यह कबीर के कर्मयोग का ही तो रास्ता है...भारत का एक बहुत बड़ा हिस्सा खुद को अलग-थलग महसूस कर रहा था..जिस प्रकार कबीर ने मगहर को अभिशाप से मुक्त किया..वैसे ही हमारी सरकार का संकल्प है कि भारत के एक-एक इंच भूमि को विकास से जोड़ा जाए।

मगहर में संत कबीर के नाम पर कई संस्थाओं के निर्माण का ऐलान करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, '24 करोड़ रुपये खर्च कर महात्मा कबीर की स्मृतियों को संजोने वाली संस्थाओं का निर्माण किया जाएगा...ये संस्थाएं पूर्वी यूपी की आंचलिक भाषाओं के विकास का भी काम करेंगी...कबीर का पूरा जीवन सत्य की खोज में बीता।' पीएम ने कहा, 'कबीर अपने कर्म से वंदनीय हो गए। धूल से उठे थे लेकिन माथे का चंदन बन गए। महात्मा कबीरदास व्यक्ति से अभिव्यक्ति हो गए और इससे भी आगे वह शब्द से शब्द ब्रह्म बन गए, विचार बनकर आए और व्यवहार बनकर अमर हो गए। उन्होंने समाज की चेतना को जागृत करने का काम किया। समाज के जागरण के लिए काशी से मगहर आए।'

पीएम मोदी ने कहा, 'सैंकड़ों वर्षों की गुलामी के कालखंड में अगर देश की आत्मा बची रही तो वह ऐसे महान तपस्वी संतों की वजह से हुआ। उत्तर हो या दक्षिण, पूरब हो या पश्चिम...कुरीतियों के खिलाफ देश के हर कोने में ऐसी महान आत्माओं ने जन्म लिया।.....कर्म और चर्म के आधार पर भेद के बजाय ईश्वर भक्ति का जो रास्ता रामानुजाचार्य ने दिखाया...उसी राह पर चलकर संत रामानंद ने जातिवाद के खिलाफ मुहिम चलाई....संत कबीर के बाद रैदास आए, फूले आए...महात्मा गांधी आए...आंबेडकर आए...इन सभी ने अपने-अपने तरीके से असमानता के खिलाफ देश को रास्ता दिखाया।'


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