• लेखक पंकज कुमार मिश्र

भारतीय लोकतंत्र का काला दिन


समय की गति पे दौड़ती हमारी युवा पीढ़ी से बहुत कम लोग जानते होंगे कि 25 जून 1975 को भारतीय लोकतंत्र की इज्जत मटियामेट कर दी गयी थी । हाईकोर्ट ने 1975 मे तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गॉधी के चुनाव को अयोग्य ठहराते हुए उनके किसी भी तरह के चुनाव लड़ने पर छ: वर्ष की रोक लगा दी थी । तब इंदिरा को लगा कि गॉधी परिवार की राजनीति खत्म ना हो जाए और फिर इंदिरा ने दंबगई दिखाई और भारतीय लोकतंत्र का खुलेआम अपहरण किया । कई दिग्गज नेताओं को खुलेआम जेल मे भर दिया गया ,कोर्ट को भंग कर दिया गया और आम जनता को मौलिक अधिकारो से दुर करने का आदेश जारी कर दिया गया । संजय गॉधी जैसे अयोग्य व्यक्ति को आपातकाल के दौरान भारत के राजा घोषित कर दिया गया हो जैसे क्योकि बिना संजय के अनुमति के पत्ता तक नही हिलता था । वर्तमान मे आपातकाल तो दुर बस सरकार कुछ सोच भर ले तो लोग लिखने की अभिव्यक्ति आजादी का लाभ उठा कर प्रधानमंत्री तक को गॉलियॉ बक रहे । हद है हमारे देश के कानून की ,जिसमे अड़चने ही अड़चने है । रमजान पर सैनिकों की आतंकियों पर कोई कार्यवाही नहीं होगी , इतना ही कहना था गृहमंत्री का कि लोगो ने इंसानियत और मजहब को दरकिनार करके सरकार को कोसना शुरू कर दिया ।कई सख्त और अमानवीय निर्णय आपातकाल में कांग्रेस के शासन काल के दौरान लिया गया , तो सब लाठी बल्लम, गोजी , झंडा लेकर उठ पड़ने के बजाय ,इंदिरा और संजय गॉधी की गुलामी करते नजर आये थे ।ये कहाँ का तुक है कि कोई देश अपने सरहद की रक्षा के लिए त्योहारो पर भी बे-कसूर नागरीको का लहु बहने दे , रमजान और दिवाली पर भी आतंकियों को मारने जाईए और बेकसूर नागरिक मारे जाए । एक जगह बोला जाता है कि आतंकियों का कोई धर्म नहीं होता , दूसरी तरफ रमजान के महीने में आतंकियों को न मारने का आदेश को लोग आतंक के धर्म से जोड़ कर देखने लगे सीधे सीधे बताया जा रहा है कि आतंकियों से मुठभेड़ मे सामान्य नागरीक भी हलाल होते है । कभी मुस्लिम के नाम पर , कभी दलित के नाम पर , कभी पिछड़ों के नाम पर , बस एकमात्र यह तुष्टिकरण की राजनीति कर कॉंग्रेस ने सबको पछाड़ दिया है !हद तो तब हो जाती है जब देश की सुरक्षा के नाम पर यह तुष्टिकरण नीति अपनाई जाती है !अपने दिल पर हाथ रखकर पूछियेगा कि क्या आपातकाल सही था क्या संविधान के अनुच्छेद ३५२ का दुरूपयोग नही हुआ ? यही कार्य अगर भाजपा के कार्यकाल में होता तो सब उसे देश विरोधी और आर एस एस का मसीहा बता देते , जितने दिहाड़ी पर कार्य करने वाले मंदबुद्धि मजदूर हैं , सबके ट्विटर, व्हाटसएप, सोसल मीडिया में भाजपा के विरुद्ध पिल पड़ते !अगर जनता ने इन्हें कंधे पर बिठाया भी है तो नीचे भी पटकना जानती है ! क्योंकि जिस कारण बैठाया है , अगर वह कोई कार्य नहीं हो रहा है बल्कि इसके विपरीत वह काँधे पर बैठकर मल मूत्र विसर्जित कर रहा है तो उसे नीचे पटकना बहुत जरुरी है और यही हुआ है कॉंग्रेस के साथ ! एक आँख से नहीं देखना चाहिए न ही अपनी आँखों पर पट्टी ही बांधनी चाहिए अन्यथा राहुल गॉधी आज इतने लाचार और प्रभावहीन ना दिखते ! यही आँखों पर पट्टी बांधे रहे तभी तो कांग्रेस को इतने घोटाले और आपातकाल लागु करने के हम सभी ने अवसर दिए ! अब यही हाल कई राजनैतिक दल के साथ हो रहा है !ये बात हम सबको याद रखना चाहिए कि चाहे होली हो , दिवाली हो , रमजान हो , ईद हो , क्रिसमस हो , देश की रक्षा से कोई खिलवाड़ नहीं होनी चाहिए ! देश सर्वोपरि है !देश है तभी ये ईद , दिवाली , क्रिसमस है , पर आम नागरीको की सुरक्षा सबसे मूल कर्तव्य होने चाहिए । और अपने देश का लोकतंत्र हमे जनता के लिए खड़े रहने के लिए प्रेरित करता है । ------ पंकज कुमार मिश्रा जौनपुरी ।


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