• लेखक पंकज कुमार मिश्र

भारतीय गुमनाम शायर


भारतीय जुबान जिस लिए पहचानी जाती है वह है हमारी बहुभाषी संस्कृति ,बेशुमार शायरो की अजिमियत और तमाम ऐसे गुमनाम कलमकार जिन्हे शायद ही हर भारतवाशी जानता हो । एम एस बेदी, ए इक़बाल, दाग़ देहलवी, कृष्ण बिहारी नूर, अल्ताफ हुसैन हाली, मिर्जा हादी रूस्वा, मीर तक़ी मीर, नज़ीर अकबराबादी, जिगर मुरादाबादी, मिर्जा असदुल्लाह खान ग़ालिब जैसे एक से एक नायाब फनकार हुए इस हिन्दूस्तान में और इनका क्या योगदान उर्दू भाषा में जग जाहिर है । बहादुर शाह जफर राजा होने के साथ साथ बेहतरीन शायर भी थे । उनके कई कलाम और काफिए आज भी लोगो के जबान पर चढ़े है । ‘सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है’ यह मशहुर लाईन राम प्रसाद बिस्मिल के कारण याद किया जाता है पर इसके असली रचनाकार बिहार के अज़ीमाबाद के रहने वाले बिस्मिल अज़ीमाबादी थे । राम प्रसाद बिस्मिल ने तो देश के लिये शहीद होते वक्त बिस्मिल अजीमाबादी की गज़ल के अशआर पढ़े थे। ऐसे ही अनेक शायर उनके गुमनाम शेर आज भी भारत मे यहां वहा भटक रहे बस जरूरत है उन्हे सही तरीके से पढ़ने और सामने लाने का ।

पंकज कुमार मिश्रा जौनपुरी


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