• लेखिका आकांशा सक्सेना

कहानी- यह कहानी समाज को खोखला पर देश को शर्मसार करते ढ़ोगी बबा पर आधारित है......


ढ़ोंगी बाबा की तरकीबें

दोपेहर का वक्त था | गाँव के अधिकांश पुरूष सभी खेतों में जुताई आदि कार्यों में व्यस्त थे और बच्चे स्कूल गये हुये थे और महिलायें घर में अकेली दरबाजे पर खड़ी होकर बातें कर रही थी कि बच्चें स्कूल से वापिस आ जायें तो उनको खाना खिलाकर फिर खेत में जाकर बच्चे के बाबा लोग को भी खाना पहुंचा आऊँ | यही वो दोपेहर का सही वक्त था जब गाँव में बाबा मांगने के बहाने लूटने को घूमने लगे कि महिलायें दान को मना नही करतीं | उन्हीं बाबाओं के साथ कुछ साध्वी हाथ में पम्पलेट लिये महिलाओं के पास जाकर बोलीं कि अरे ! ओ मांई ये लो बाबा शिवहरिज जी का पर्चा बाबा बहुत महान है कैलाश से बीस वर्ष तपस्या करके सिद्धियाँ लेकर लौटें हैं और उनके पास हर दुख - हर परेशानी का हल है | तुम्हारी फसल इस साल बहुत अच्छी होगी और तुम्हारा बच्चा उनकी कृपा से बहुत बड़ा आदमी बन सकता है | हम सब जो तुम्हारे सामने जिंदा खड़े हैं बाबा जी की कृपा से है | हम लोग ट्रैन हादसे में विकलांग हो गये थे पर देखो! बाबा जी की कृपा से हम ठीक हो गये और अब वही साक्षात् भगवान जी की सेवा में लगे हैं | हे! माँई एक बार कैम्प में आओ तुम्हारे जिले में भगवान पधारे हैं | यह सब सुनकर गांव की गरीब महिलायें खुश हो गयी और बोलीं कि कहां ठहरे हैं बाबा ? हमारी गरीबी दूर कर दें बस ? यह सुनकर साध्वी बोली कि गोपाल वाटिका गेस्ट हाउस में वहाँ आकर देखना बाबा का चमत्कार कुछ ऐसा है कि बड़े-बड़े अधिकारी और मंत्री भी सिर झुकातें हैं | कल दोपेहर दो बजे सत्संग शुरू होगा और बाद में अपनी चिट्ठी दे देना वो सब ठीक कर देगें | दूसरी महिला बोली कि मेरे कोई औलाद नही हैं मैं जरूर आऊंगी | बाबा के ऐजेंट लोग सभी आम-ओ-खास को मूर्ख बनाने में कामयाब रहे और मुस्कुराते हुये बोले कि माँई! साधू को भोजन करा दे भगवान तुम्हारा भला करें | बेचारी बच्चों और पति के हिस्सा का बना खाना उन सभी बाबा के ऐजेंट को अंधविश्वास के चलते खिला देतीं हैं और सब मुफ्त का भोजन कर वहाँ से नौ दो ग्यारह हो जाते हैं | दूसरे दिन गांव की सभी महिलायें जिले के सबसे महंगे गेस्ट हॉउस गोपाल वाटिका में समय से पहले पहुंच जातीं है तो देखतीं हैं कि गेस्ट हाउस में पांव रखने तक की जगह नही है | भीड़ इतनी है कि बाबा का सिंहासन भी ठीक से नजर नही आ रहा तभी उस सिंहासन की आरती हुई और फिर सभी को आरती दी जाने लगी वो पूरी थाली मिनटों में रूपयों से भर गयी और वो पैसा पॉलीथीन में भर लिया जाता और फिर आरती देना दूसरी ओर शुरू हो जाता यही क्रम बहुत देर तक चलता रहा जब तक कि आरती के बहाने सभी से पैसा न ले लिया गया | गाँव की भोली महिलाओं के साथ-साथ दूर शहरों से आयी पढ़ी- लिखीं महिलायें भी ऊचक -ऊचक कर यही सब देख रहीं थीं और मन ही मन यह प्रार्थना कर रहीं थी कि हे! भगवान आज बाबा शिवहरिज जी के दर्शन करा दो एक बार मिलवा दो ताकि मेरी हर समस्या का निराकरण हो सके | वह सोच ही रहीं थी कि बाबा का आगमन हुआ और चारों तरफ से बाबा के भक्तों ने फूलों की बरसात कर दी जिसमें बाबा कंधें तक ढ़क गये | बाबा ने दो- तीन अच्छीं बातें बतायीं कि मैं कोई ढ़ोंगी बाबा नही हूँ अघोरी और तांत्रिक हूँ तुम्हारे कपाल की हर गतिविधि मुझे साफ दिख रही है | मैं कोई पैसा नही लेता बाकि भक्त लोग की खुशी है उन्हें मैं खुश होने से रोक नही सकता | वो फूल बरसायें या धन भक्त तो भक्त है जो मेरा बहुत प्रिय है | बस इतना कहकर बाबा जो सोने चाँदी और हीरे के आभूषणों से सजे थे वह सिंहासन से उठ कर दूसरे हॉल की तरफ चले गये | बाबा के ऐजेंट ने भीड़ को शांत करते हुये कहा कि बाबा को शक्तियाँ एक जगह ज्यादा देर तक बैठने नही देतीं आप लोग अपनी परेशानी कागजों में लिख कर लायें हो तो उस बोक्स में डाल दें और जो नही लायें वह मन में सोचें बाबा अंतर्यामी हैं उनको सब पता हैं | इतना सुनते ही एक काफी अमीर महिला जो चेहरे से ही लग रही थी वह चीख पड़ी कि बाबा से मिलवा दो मैं दुबई से बड़ी आस लेकर आयीं हूँ | दुबई सुनते ही बाबा के ऐजेन्ट ने उस महिला को बाबा के पास ले जाकर बैठा दिया |वह फूट-फूट कर रो पड़ी और बोली मेरी समस्या का उपाय बताओ बाबा आपको कोटि-कोटि प्रणाम है | बाबा ने कहा," तुम शांत हो जाओ मैंने सब देख लिया है | तेरी परेशानी का हल है तांत्रिक हवन क्रिया | वह महिला बोली," बाबा जो पैसा लगे मैं देने को तैयार हूँ बस हवन करा दीजिये | बाबा गुस्से से बोला," पैसा से मेरा कोई बास्ता नही मैं कोई ढ़ोगी बाबा,भगत,ओझा नही हूँ मैं तो भूतनाथभक्त अघोरी हूं, तांत्रिक हूं | तुम्हारे कपाल में क्या चल रहा सब साफ देख सकता हूँ | महिला बहुत खुश थी | बाबा ने अपने पास खड़े ऐजेन्ट से कहा,'' इन माँई को तांत्रिक हवन सामग्री की लिस्ट पढ़ के सुना दो और दे दो | उस ऐजेन्ट ने हवन सामग्री सुनाना शुरू किया कि ताजे जले मुर्दे की गर्म राख, सात नदियों का जल, उल्लू का पंख, सुअर के आंख का बाल, ऊँठ की पूँछ का बाल, दो दिन के बच्चे के सिर का बाल, सौलह साल की लड़की के पांव के नाखून, कछुआ का खून, पांच किलो शुद्ध बकरी का दूध, दो किलो गाय का शुद्ध घी, काली उरद , काले तिल, लौंग, जायफल दो किलो बतासे और झुआरे लाकर दे दो | आपके पास दो महीने का टाईम हैं इंतजाम कर लो | वह महिला हाथ जोड़कर बोली," बाबा दो महीने क्या पूरी जिंदगी में यह सामान अरेन्ज नही कर पाऊंगी | बाबा मदद करो कुछ | कोई को रास्ता होगा | बाबा ने कहा," दुखी मत हो आप कमरे न. 7 लिखा है वहाँ जानकारी मिल जायेगी | बाबा का ऐजेन्ट उस महिला को कमरा न.7 में ले जाकर बोला," आप टैंशन मत लो कुछ बनवासी लोग हैं जो यह सब अरेन्ज कर देगें पर फ्री में कैसे करेगें ? महिला बोली," जल्दी बताओ क्या हो सकता है ? वह ऐजेन्ट बोला," यह लो अकान्ट नम्बर आप इसमें पचास हजार डाल दो जाकर सामग्री के लिये और पचास हजार तुम्हारे दुश्मन को तुम्हारे वश में करने की अचूक दवा बनाने के लिये | महिला मुस्कुराई तो ऐजेन्ट बोला," बाबा पैसा को हाथ भी नही लगाते पर आप समझदार हैं यह बनवासी फ्री में कुछ खोज के नही लायेगें पर यकीन मानो काम पक्का होगा | आप उधर देखो भीड़ जिसमें जिले का हर बड़ा अधिकारी, विधायक और मंत्री जी भी देखो पांव छूते हुये | सोचो ! बाबा में पॉवर नही तो इतनी भीड़ क्यों है | वह महिला बाबा जी का जलवा देख के दंग रह गयी औरफिर बाबा शिवहरिज जी के चरणों के पास जाकर अपने सोने की चैन सोने के कंगन और हीरे की अंगूठी उतार कर सह बाबा के चरणों में रख कर बोली," धन्यवाद प्रभु जी |" वह महिला भीड़ में बाहर आकर बोली," सचमुच बाबा जी कुछ नही लेते वो तो अपने भक्तों के दुखों के मिटा देते हैं |" गांव की महिलायें भीड़ में दबीं -दबीं ही बाहर घर को लौट आयीं जहाँ उसके बच्चे और परिवार उनके लौटने का इंतजार कर रहे थे और जैसे ही बच्चों ने अपनी माँ को आता देखा वह उनसे लिपट गये | महिलायें एक स्वर में बोलीं हमारा भगवान तो यही हैं हमारा घर संसार | वो तो एक नम्बर का ढोंगी बाबा था जिसने उस अमीर महिला को बेवकूफ बनाकर एक लाख लूट लिये और उसे पता भी न चला | हम तो छिप कर सब देख आये | यह सुनकर गांव के बुजुर्ग बोले," अब समझीं , ये सब ढ़ोगी बाबाओं की पैसे ऐंठने की तरकीबें होती हैं| हमने तो कितने बार रोका कि तुम सब इन ढोंगी बाबाओं से दूर रहो और लालच न करो क्योंकि लालच बढ़ा तो धोखा बड़ा |

ब्लॉगर आकांक्षा सक्सेना


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